हम क्यों सृजन करते हैं?
'Space Art' के माध्यम से हृदय की प्रेरणा
NEW PUBLICATION: Rebalancing Space Governance: a Global South perspective on outer space as a global commons (FRONTIERS IN SPACE TECHNOLOGIES JOURNAL)
हम क्यों सृजन करते हैं?
'Space Art' के माध्यम से हृदय की प्रेरणा
लेखक: शिवशंकर पालित
(लाइफ-टू एंड बियॉन्ड फाउंडेशन और ब्लू मार्बल स्पेस इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस)
(भाषा की समीक्षा सुप्रिया हाजरा द्वारा की गई)
प्रकाशित: १७/१२/२०२५
"We don't read and write poetry because it's cute. We read and write poetry because we are members of the human race. And the human race is filled with passion," हॉलीवुड फिल्म "Dead Poets Society (1989)" में अभिनेता रॉबिन विलियम्स का किरदार जॉन किटिंग घोषणा करते है। यह गहरा अवलोकन कविता से आगे बढ़कर हमारी सृजन, कल्पना और अन्वेषण की मूल भावना को छूता है। सर्वोपरि, "इंसान होने का मतलब ही अन्वेषण करना है"। "Art" के बिना "Earth" शब्द सिर्फ एक निर्जीव अक्षरमात्र बन जाता है, जो काव्यात्मक और शाब्दिक दोनों अर्थों में अर्थ और आत्मा से खाली है। स्पेस आर्ट इस खालीपन को भरता है, विशाल ब्रह्मांडीय शून्यता को मानवीय भावनाओं, जिज्ञासा और जुड़ाव के कैनवास में बदल देता है। महाकाश अन्वेषण लंबे समय से मानवता की कल्पना को मोहित करता रहा है, फिर भी ब्रह्मांड कई लोगों के लिए दूर और अमूर्त बना हुआ है, ऐसा क्षेत्र जो वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए आरक्षित लगता है। स्पेस आर्ट इस सीमा को रचनात्मक अभिव्यक्ति से पार करता है, ब्रह्मांड को सबके लिए सुलभ बनाता है। यह सिर्फ मनोरंजन से ऊपर है; यह एक शक्तिशाली माध्यम है जो दिल को महाकाशीय स्वर्ग से जोड़ता है, ठंडे वैज्ञानिक तथ्यों को गर्म मानवीय कहानियों में बदलता है जो हर उम्र के लोगों को आश्चर्य से प्रेरित करता है।
लाइफ-टू एंड बियॉन्ड फाउंडेशन का एक ही लक्ष्य है: लोगों को अंतरिक्ष में उनकी अनोखी जगह ढूंढने के लिए सशक्त बनाना। २०२४ से विनम्र लेकिन परिवर्तनकारी पहलों के जरिए, यह संस्था दिखाती है कि चित्रकला अभ्यास कैसे अंतरिक्ष अन्वेषण को मानवीय बनाता है।
मलेशियाई स्पेस आर्टिस्ट नुरुल स्याहिरा बिंति नजारुद्दिन द्वारा एक प्रस्तावना - “कला के साथ हमारा रिश्ता रात के तारों भरे आसमान से जुड़ाव जितना ही बुनियादी है। इतिहास में दोनों ने मानव सभ्यता को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। इन्होंने समाजों को समय नापना, आसपास की दुनिया में घूमना और सिर्फ दिखने वाली चीजों से आगे का मतलब बताना सिखाया। आज की नई तकनीकें भले ही लगें कि खगोल की खोज में कला की जरूरत कम हो गई, लेकिन कला अभी भी जरूरी है। यह वैज्ञानिक खोज को इंसानी मूल्यों से जोड़े रखती है। जैसे-जैसे हम ब्रह्मांड की गहराई में जाते हैं, कला एक जरूरी संतुलन बनाती है। यह सुनिश्चित करती है कि विज्ञान की प्रगति हमें इंसानियत से अलग न कर दे। विज्ञान तो सबको आगे ले जाता है, लेकिन कला उस प्रगति को इंसानी बनाती है। इससे हम सोचते हैं, विनम्र रहते हैं और सही-गलत का ध्यान रखते हैं।”
अप्रैल २०२४: बच्चों की नजर से महाकाश
स्पेस आर्ट को बढ़ावा देने की दिशा में संस्था का पहला बड़ा कदम २०२४ के अप्रैल में उसके "आउटरीच सराभाई" पहल से शुरू हुआ, जो महाकाश को मुख्यधारा की चर्चा में लाने के लिए था। कोलकाता के रशियन सेंटर फॉर साइंस एंड कल्चर (गोर्की सदन) के सहयोग से, संस्था ने "Cosmos through the Eyes of Children!" का आयोजन किया। "Human Spaceflight for Peace & Friendship" नामक प्रदर्शनी (३ -१२ अप्रैल, २०२४) ने दो ऐतिहासिक महत्वपूर्ण उप्लभ्धियों का जश्न मनाया: विंग कमांडर और पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के अंतरिक्ष यात्रा की ४०-वीं वर्षगांठ और यूरी गागरिन की पृथ्वी के पहले मानव के रूप में अंतरिक्ष पहुंचने की ६३-वीं वर्षगांठ। यह इवेंट प्रदर्शनी में ३०० से ज्यादा आम लोगों को आकर्षित किया, जिसमें कोलकाता और आसपास के इलाकों से ८० से ज्यादा बच्चे और छात्र शामिल थे, साथ ही विशेष क्षमतावाले छात्र भी। प्रतिभागियों ने स्पेस आर्ट प्रतियोगिता, कागज के रॉकेट बनाने की वर्कशॉप और दुनिया भर के छात्रों द्वारा बनाए स्पेस आर्ट की प्रदर्शनी में हिस्सा लिया (चित्र १ और २ में दिखाया गया है)। इन कला कार्यों ने युवाओं की मानव अंतरिक्ष यात्रा पर दृष्टि दिखाई, जो सिर्फ तकनीकी उपलब्धियां नहीं बल्कि ब्रह्मांड से उनके भावुक जुड़ाव को भी चित्रित करता है।
चित्र १: स्पेस आर्ट प्रतियोगिता में मानव अंतरिक्ष यात्रा विषयक चित्रकारी के सामने जमा बच्चे। यह इवेंट रशियन सेंटर फॉर साइंस एंड कल्चर, कोलकाता और LIFE-To & Beyond Foundation, India द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।
चित्र २: रशियन सेंटर फॉर साइंस एंड कल्चर, कोलकाता और LIFE-To & Beyond Foundation, India द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'Human Spaceflight for Peace and Friendship' कार्यक्रम के कुछ झलक।
मार्च-अप्रैल २०२५: हाथों से सृजन और वैज्ञानिक आश्चर्य
इस कार्यक्रम पर आधारित, संस्था ने २५ मार्च २०२५ को ‘एस्ट्रोनॉट मैकलिफ स्पेस एड-टेक’ इनिशिएटिव के अंतर्गत एक वेबिनार आयोजित किया, जो क्रिस्टा मैकलिफ के सम्मान में था, जो अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुनी गई पहली शिक्षिका थीं। १९८६ के चैलेंजर आपदा में दुर्भाग्य से मैकलिफ और उनके सहयोगी प्राण खो बैठे, जो सिखाता है कि अंतरिक्ष अन्वेषण सिर्फ तकनीकी प्रगति से सफल नहीं होता बल्कि मानवीय जुड़ाव और ज्ञान से भी होता है। मैकलिफ का विश्वास "महाकाश सबके लिए" आज भी दुनिया भर के शिक्षकों और वैज्ञानिकों को प्रेरित करता है। वेबिनार में मलेशिया के कैनवास टू कोस्मोस स्टूडियो की विशेषज्ञ मेंटर नुरुल साहिराह बिनती नजरुद्दीन मौजूद थीं, जिन्होंने सृजनात्मक अभिव्यक्ति कैसे शिक्षा को बदलती है इस पर अंतर्दृष्टि साझा की। एक आकर्षक फायरसाइड चैट ने दुनिया भर के ५० से ज्यादा प्रतिभागियों तक पहुंच बनाई। २५ -२७ अप्रैल २०२५ तक, संस्था ने कैनवास टू कोस्मोस स्टूडियो के साथ स्पेस आर्ट पर महाकाश शिक्षा वर्कशॉप चलाई, जो मैकलिफ इनिशिएटिव के हाथों से कार्यक्रम का पहला बैच था। मेंटर नुरुल साहिराह ने प्रतिभागियों को कोस्मिक इम्प्रेशनिस्ट स्टाइल चित्रकला पर गाइड किया, जो विंसेंट वैन गॉग के "Starry Night" से प्रेरित था। वैन गॉग समझते थे कि रात के आकाश में दिन के प्रकाश से ज्यादा रंग समृद्ध होते हैं और मृत्यु को खुद "तारों में यात्रा का एक तरीका" मानते थे। उनके घूमते ब्रह्मांडीय दृश्य खगोलीय सटीकता नहीं बल्कि आकाश की ओर देखने का भावुक अनुरणन पकड़ते थे, जो आज के कलाकार जारी रख रहे हैं। वर्कशॉप में प्रतिभागियों ने इस स्टाइल में धूमकेतु चित्रित कर अद्भुत चित्र बनाई, जो व्यक्तिगत व्याख्या के साथ वैज्ञानिक अवलोकन को जोड़ती है (चित्र ३ में दिखाया गया है)।
चित्र ३: Space Education Workshop on Space Art कार्यक्रम की तस्वीर, जो LIFE-To & Beyond Foundation, India और Canvas To Cosmos Studio, Malaysia द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।
मई-जून २०२५: सृजनात्मक अभिव्यक्ति शिक्षण विधि के रूप में
फॉलो-अप के रूप में, मई-जून २०२५ में चली एक पायलट स्टडी ने सृजनात्मक ब्रह्मांडीय अन्वेषण की शैक्षिक शक्ति दिखाई। ब्लू मार्बल स्पेस इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की डॉ. अनिंदिता दास के सहयोग से, संस्था ने कोलकाता के ऋषि अरविंद मेमोरियल एकेडमी के प्राइमरी स्कूल के छात्रों के साथ काम किया। कक्षा २ और किंडरगार्टन के आठ छात्र-छात्राओं ने "महाकाश में जीवन" थीम को अपनी चित्रों में दर्शाया, जिसमें अंतरिक्ष में तैरते आवास, नेपच्यून से देखा बृहस्पति आदि शामिल थे (चित्र ४ और ५ में दिखाया गया है)।ये काम दिखाते हैं कि छोटो के मन मैं भी जटिल एस्ट्रोबायोलॉजिकल या अंतरिक्ष अवधारणाओं को समझ सकते हैं जब उन्हें कलात्मक अभिव्यक्ति की आजादी दी जाती है। सृजनात्मक अन्वेषण इस तरह शिक्षा का उपकरण बनता है जो बचपन से कल्पनाशील विकास के साथ वैज्ञानिक साक्षरता को पोषित करता है।
आभार और मान्यता
चित्र ४: कोलकाता के बच्चे स्पेस आर्ट पायलट स्टडी में हिस्सा ले रहे, जो सृजनात्मक अभिव्यक्ति को शिक्षण विधि के रूप में समझने पर काम कर रही है।
चित्र ५: पायलट स्टडी में "महाकाश में जीवन" थीम पर कोलकाता के बच्चों के सृजनात्मक चित्रकला कार्यों में शामिल थे:
बर्फ से ढका विश्व - नेपच्यून से देखा यूरेनस और बृहस्पति [अंबिका दास, कक्षा २]।
महाकाश में जीवन [द्वितिका मंडल, कक्षा २]।
मंगल पर जीवन [आहान तामांग, कक्षा २]।
महाकाश में जीवन [देबोस्मिता मुखर्जी, कक्षा २]।
महाकाश में तैरता आवास [समृद्धि साहा, कक्षा २]।
अन्य ग्रह पर जीवन [सम्प्रीति सोम, कक्षा २]।
महाकाश में जीवन और गहरा समुद्र क्या एक जैसे? [श्वेतांक चक्रवर्ती, एलकेजी-२]।
महाकाश में जीवन [रेयांश कुंडू, कक्षा २]।
द बियॉन्डर्स न्यूजलेटर: हर महीने एक स्पेस-थीम्ड आर्ट
ज्योतिर्विज्ञान और ज्योतिरपदार्थविज्ञान अंतरिक्ष शिक्षा की नींव बनाते हैं, लेकिन उभरते क्षेत्र जैसे एस्ट्रोकेमिस्ट्री, एस्ट्रोबायोलॉजी, प्लैनेटरी साइंस और स्पेस आर्ट विभिन्न समुदायों को समान रूप से जोड़ते हैं। इन डोमेन में संसाधन और अवसर भले ही प्रचुर हों, लेकिन दृश्यता एक बड़ी चुनौती रही है। लाइफ-टू एंड बियॉन्ड फाउंडेशन इसे 'The Beyonder's Newsletter' के माद्यम से हल करता है, जो मासिक, पीयर-रिव्यूड पैकेज है जिसमें नवीनतम सरल सामग्री, करियर पथ, अंतरिक्ष और रॉकेट लॉन्च इवेंट अलर्ट तथा STEAM क्षेत्र के अग्रणी और उभरते पेशेवरों की मानव-केंद्रित कहानियां शामिल होती है। एक अनोखी विशेषता विजुअल आर्ट कवर है जो चित्रकला और अंतरिक्ष को जोड़ता है (AI से बनाया, विस्तृत ध्यान से संपादित और मान्यता प्राप्त)। हर संस्करण में विश्वभर के विभिन्न चित्र-कलात्मक शैलियों को दिखाया जाता है, जो पारंपरिक से लोककला और आधुनिक-समकालीन तक फैली हैं (चित्र ६ में दिखाया गया है)। ये विजुअल कवर स्पेस आर्ट को सार्वभौमिक भाषा बनाते हैं, विश्व की विभिन्न विजुअल आर्ट फॉर्म्स को मान्यता देते हैं और दिखाते हैं कि अंतरिक्ष अन्वेषण भूगोल व संस्कृति से परे है। दो वर्ष पहले स्थापना के बाद से, न्यूजलेटर ने १७००+ लिंक्डइन सब्सक्राइबर और २०+ पैट्रॉन टीम सदस्य बनाए हैं जो विशेष सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, जैसे एक दिन पहले अंतरिक्ष और रॉकेट लॉन्च इवेंट नोटिफिकेशन तथा एक्सक्लूसिव कम्युनिटी एक्सेस। यह कम्युनिटी मिलकर संस्था के दृष्टिकोण को साकार करता है कि अंतरिक्ष सबका हो।
चित्र ६: The Beyonder's Newsletter के कुछ उल्लेखनीय कवर, जिसमें स्पेस-थीम्ड आर्ट है जो पूरी तरह या आंशिक AI-generated and edited। यह आर्ट विश्व की विभिन्न विजुअल आर्ट फॉर्म्स से प्रेरित है, विशेषकर भारतीय लोककला से।
एक सरल लेकिन गहरा सत्य प्रकट
ये सभी पहल एक सरल लेकिन गहरे सत्य को उजागर करती हैं: कलात्मक अभिव्यक्ति सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए है। जब वयस्क, शिक्षक, वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर और कलाकार ब्रह्मांड को रचनात्मक रूप से कल्पना करने में सहयोग करते हैं, तो वे भावुक जुड़ाव बनाते हैं जो सिर्फ वैज्ञानिक तथ्य नहीं जुटा सकते। अन्वेषण मानवीय बनता है इस स्वीकृति से कि मनुष्य अज्ञात में सिर्फ डेटा इकट्ठा करने नहीं जाते, बल्कि गहरी अस्तित्वगत इच्छाओं को पूरा करने, ब्रह्मांड में अपनी जगह समझने, वर्तमान से परे सपने देखने और विशाल ब्रह्मांड के बीच मानवता के "शक्तिशाली नाटक" में अपना श्लोक जोड़ने जाते हैं। शिक्षा में रचनात्मकता और विज्ञान का एकीकरण बहु-विषयी सीखने का अनुभव बनाता है जो भावी पीढ़ी को STEAM करियर के लिए तैयार करता है और रचनात्मक क्षमताओं को पोषित करता है। जब छात्र शनि-ग्रह के चाँद- यूरोपा पर काल्पनिक बायोसिग्नेचर बनाते हैं या इंटरस्टेलर आवास मॉडल गढ़ते हैं, तो वे विश्लेषणात्मक और सहज दोनों चिंतन में लगे होते हैं। यह समग्र दृष्टिकोण सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, बल्कि दूरदर्शी बनाता है जो अभी अनसुलझे चुनौतियों के हल कल्पना कर सकें।
चूंकि आर्टेमिस जैसे स्पेस प्रोग्राम से मानवता फिर से चंद्र अन्वेषण के द्वार पर खड़ी है और मंगल पर मानव अभियान की प्रतीक्षा कर रही है, इसलिए रचनात्मक अभिव्यक्ति और महत्वपूर्ण हो रही है। यह याद दिलाता है कि अन्वेषण मूलतः भावना, जिज्ञासा और खोज अभिव्यक्ति की जरूरत से प्रेरित है। ऐसी पहलों से, कलात्मक अभिव्यक्ति ब्रह्मांड को मानव हृदय से जोड़ती रहती है, यह सुनिश्चित करती है कि अंतिम सीमा भावी पीढ़ी के लिए सुलभ, प्रेरणादायी और गहराई से मानवीय बनी रहे।